आरोही पवन (Anabatic Wind)

Submitted by admin on Tue, 12/29/2009 - 13:58
पर्वत के ढाल से ऊपर की ओर प्रवाहित होने वाली पवन। यह पवन उस समय बहना शुरु करती है जब ढाल की निकटतम वायु उसी ऊंचाई पर स्थित पर भू्मि से अधिक दूरी की वायु से धूप के कारण अधिक तेजी से गर्म हो जाती हैं। गर्म होने वाली वायु ऊपर उठ जाती है और अपने आसपास की वायु द्वारा प्रतिस्थापित होती है। आरोही पवन सुबह के समय, धूप निकलने से पहले, अधिक प्रबल होती है।

आरोही पवन (anabatic wind) दिन में घाटी में पर्वतीय ढालों (नीचे से ऊपर) की ओर चलने वाली स्थानीय पवन। दिन में जब पर्वतीय ढाल सूर्यताप से गर्म हो जाता है, वहाँ की वायु गर्म (हल्की) होकर ऊपर उठती है और रिक्त स्थान की पूर्ति हेतु घाटी से ऊपरी ढालों की ओर पवन प्रवाह होने लगता है। इसे घाटी समीर/पवन (valley breeze/wind) भी कहते हैं। इसके विपरीत रात में अवरोही पवन (katabatic wind) पर्वतीय ढाल से घाटी की ओर चलती है।

स्थानीय हवा जो विशेषतः ग्रीष्मकाल में अपराह्न के समय संवहन के द्वारा पर्वत ढालों पर की वायु के अत्यंत गर्म हो जाने के कारण घाटियों में ऊपर की ओर चलने लगती है। कहीं-कहीं ये पवन रात के समय भी चलते हैं।